Thursday, October 15, 2026
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तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल हेतु विधिवत बंद

रूद्रप्रयाग। विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। भगवान तुंगनाथ के दर्शनों के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। प्रातः काल मंदिर दर्शनार्थ खोला गया, जिसके बाद नित्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इसके पश्चात कपाट बंद करने की प्रक्रिया बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में साढ़े दस बजे आरंभ हुई।

भोग, यज्ञ, हवन और पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को विधिवत समाधि रूप दिया गया। ठीक पूर्वाह्न साढ़े 11:30 बजे भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके उपरांत भगवान की चल विग्रह डोली मंदिर परिसर से प्रथम पड़ाव चोपता के लिए रवाना हुई। डोली यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में “जय बाबा तुंगनाथ” के जयघोष गूंजते रहे, जबकि ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वादन से वातावरण भक्तिमय बन गया। इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए पाँच सौ से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने तृतीय केदार श्री तुंगनाथ के कपाट बंद होने के अवसर पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उन्होंने बताया कि इस यात्रा वर्ष में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। उन्होंने कहा कि भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह डोली के श्री मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ पहुँचने के बाद शीतकालीन पूजाएं आरंभ होंगी। मंदिर समिति शीतकालीन यात्रा को भी प्रोत्साहित करेगी।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल डोली प्रथम पड़ाव चोपता के लिए रवाना हुई है। डोली शुक्रवार, 7 नवंबर को दूसरे पड़ाव भनकुन में प्रवास करेगी तथा शनिवार, 8 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ पहुँचेगी।

इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, डा. विनीत पोस्ती, मुख्य कार्याधिकारी/कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल, मठापति रामप्रसाद मैठाणी, केदारनाथ प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, प्रबंधक बलबीर नेगी, अरविंद शुक्ला, प्रकाश पुरोहित, दीपक पंवार, चंद्र मोहन बजवाल, पुजारी अतुल मैठाणी एवं अजय मैठाणी सहित अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं हक-हकूकधारी उपस्थित रहे।

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