Waqf Act : सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की कुछ धाराओं पर लगाई रोक

0
116

Waqf Act : शीर्ष अदालत ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून पर केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती है। हमने माना है कि अनुमान हमेशा कानून की संवैधानिकता के पक्ष में होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषदों में गैर-मुस्लिमों की संख्या तीन से अधिक नहीं हो सकती।

IND vs PAK : भारत के हाथ न मिलाने को लेकर ACC के सामने रोया रोना पाकिस्तान

कोर्ट ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई चुनौती पर प्रथम दृष्टया विचार किया है और पाया है कि पूरे कानून पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसके अनुसार पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा, जब तक यह तय करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।

किन तीन मुद्दों पर सुनाया अंतरिम फैसला?

क्या वक्फ घोषित की गई संपत्तियों को अदालतें वक्फ की सूची से हटा (डिनोटिफाई करना) सकती हैं या नहीं?
क्या कोई संपत्ति उपयोग के आधार पर वक्फ (वक्फ बाय यूजर) या किसी दस्तावेज के जरिए वक्फ (वक्फ बाय डीड) घोषित की जा सकती है?

22 मई को सुरक्षित रख लिया था फैसला

सभी मुद्दे वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठे थे। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 22 मई को इन तीनों पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना था, जिसके बाद अंतरिम अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।

सरकार ने वक्फ कानून का किया था बचाव

केंद्र सरकार ने इस कानून का मजबूती से बचाव किया था। सरकार का कहना है कि वक्फ अपने आप में एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ व्यवस्था है। इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता, क्योंकि जो कानून संसद से पास होता है, उसे संविधान सम्मत माना जाता है। सरकार ने यह भी कहा कि भले ही वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

25 अप्रैल को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में 1,332 पन्नों का प्रारंभिक हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामे में अदालत से अनुरोध किया गया कि वह इस कानून पर रोक न लगाए, क्योंकि यह कानून संसद ने पारित किया है और इसे संविधान-सम्मत माना जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कहा था कि यह अधिनियम ऐतिहासिक कानूनों और सांविधानिक सिद्धांतों से पूरी तरह अलग है और इसका मकसद वक्फ की संपत्ति पर गैर-कानूनी तरीके से नियंत्रण करना है।

पांच अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी

केंद्र सरकार ने आठ अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था। इससे पहले पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अधिनियम को मंजूरी दी थी। लोकसभा और राज्यसभा ने क्रमशः तीन और चार अप्रैल को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया था।

Nepal Crisis : हिंसा नेपाल में नुकसान उत्तराखंड को, रोजाना 50 लाख का कारोबार ठप

 dipr

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here